जम्मू-कश्मीर,26 नवम्बर। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता को सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी कर कहा है कि अब किसी भी प्रकार के सरकारी दस्तावेज इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म्स जैसे जीमेल, व्हाट्सएप, या अन्य थर्ड-पार्टी एप्लिकेशंस के जरिए नहीं भेजे जाएंगे।
फैसले का कारण
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य सरकारी दस्तावेजों और सूचनाओं की गोपनीयता को बनाए रखना और उन्हें साइबर हमलों व डेटा लीक से बचाना है।
साइबर सुरक्षा: इंटरनेट आधारित एप्लिकेशंस पर डेटा लीक और साइबर अटैक्स का खतरा बढ़ गया है।
गोपनीयता सुनिश्चित करना: सरकारी फाइलें और सूचनाएं अक्सर संवेदनशील होती हैं, जिन्हें बाहरी हस्तक्षेप से बचाने की आवश्यकता है।
क्या हैं नए दिशा-निर्देश?
सरकारी ईमेल का उपयोग: अब सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी केवल सरकारी ईमेल सेवाओं का उपयोग करेंगे।
थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म पर रोक: जीमेल, व्हाट्सएप और अन्य एप्स का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
क्लाउड स्टोरेज पर प्रतिबंध: गूगल ड्राइव और अन्य क्लाउड सेवाओं का उपयोग भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।
संभावित प्रभाव
सरकारी कामकाज पर असर: थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध से सरकारी प्रक्रियाओं में थोड़ी धीमी गति आ सकती है।
साइबर सुरक्षा में सुधार: यह कदम सरकारी डेटा को सुरक्षित रखने में मददगार साबित हो सकता है।
कर्मचारियों की नई ट्रेनिंग: सरकारी कर्मचारियों को नए प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
विशेषज्ञों की राय
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म की जरूरत होगी।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर सरकार का यह फैसला इंटरनेट युग में डेटा सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस नई नीति को कैसे प्रभावी ढंग से लागू करता है और इससे सरकारी कामकाज पर क्या असर पड़ता है।