वाशिंगटन ,5 अप्रैल। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रेसिप्रोकल टैरिफ के ऐलान के बाद लगातार दूसरे दिन 4 अप्रैल को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट रही। डाउ जोन्स इंडेक्स करीब 2,231.07 पॉइंट या 5.50% गिरकर 38,314 के स्तर पर बंद हुआ। एक दिन पहले भी ये 3.98% गिरा था। यानी दो दिन में डाउ जोन्स 9% से ज्यादा गिरा है।
वहीं, S&P 500 इंडेक्स में 322.44 पॉइंट या 5.97% की गिरावट रही। ये 5,074 के स्तर पर आ गया। नैस्डेक कंपोजिट 962.82 अंक या 5.82% गिरकर 15,587 के स्तर पर बंद हुआ। एपल, बोइंग, इंटेल और डाउ INC जैसी कंपनियों के शेयरों में 12% तक की गिरावट रही।
दो दिन में मार्केट कैप करीब 5 ट्रिलियन डॉलर घटा
इस गिरावट से अमेरिकी शेयर बाजार का मार्केट कैप 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा कम हो गया। S&P 500 इंडेक्स का मार्केट कैप 3 अप्रैल को 45.388 ट्रिलियन डॉलर था, जो 4 अप्रैल को घटकर करीब 42.678 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है। वहीं 2 अप्रैल को मार्केट कैप 47.681 ट्रिलियन डॉलर था। यानी, दो दिन में मार्केट कैप करीब 5 ट्रिलियन डॉलर घट चुका है।
अमेरिकी बाजार में गिरावट के 4 कारण
- चीन ने भी अमेरिका पर 34% टैरिफ लगाया: चीन ने शुक्रवार को अमेरिका पर 34% जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। नया टैरिफ 10 अप्रैल से लागू होगा। दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दुनियाभर में जैसे को तैसा टैरिफ लगाया था। इसमें चीन पर 34% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था। अब चीन ने उतना ही टैरिफ अमेरिका पर लगा दिया है।
- कंपनियों को मुनाफा कम होने का डर: अमेरिका ने सभी आयातित सामानों पर 10% न्यूनतम टैरिफ और कुछ देशों (जैसे चीन पर 34%, वियतनाम पर 46%) पर इससे भी ज्यादा शुल्क लगाने का ऐलान किया है। इससे वहां से आने वाले सामानों की कीमत बढ़ जाएगी। इससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा। मुनाफा कम होने की आशंका से निवेशकों ने शेयर बेचना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में गिरावट है।
- ग्लोबल ट्रेड वॉर का डर: अमेरिकी की ओर से टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद दूसरे देश भी जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं। मिसाल के तौर पर, अगर भारत पर 26% टैरिफ लगा है, तो भारत भी अमेरिकी सामानों पर शुल्क बढ़ा सकता है। इससे ग्लोबल ट्रेड में रुकावट आ सकती है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित होगी। इस अनिश्चितता से निवेशक घबरा गए है और उन्होंने शेयर बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
- इकोनॉमिक स्लोडाउन की चिंता: टैरिफ से सामान महंगा होने पर लोग कम खरीदारी करेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो सकती है। साथ ही, मांग कम होने से कच्चे तेल की कीमतें भी गिरीं है (अमेरिकी क्रूड $69.63 प्रति बैरल)। ये कमजोर इकोनॉमिक एक्टिविटी संकेत है। इससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है और बाजार में गिरावट तेज हुई है।
3 अप्रैल को डाउ जोन्स 3.98% गिरकर 40,545 के स्तर पर बंद हुआ था
डाउ जोन्स एक दिन पहले 1,679 पॉइंट (3.98%) गिरकर 40,545 के स्तर पर बंद हुआ। था वहीं, S&P 500 इंडेक्स में 274 पॉइंट (4.84%) की गिरावट रही। ये 5,450 के स्तर पर आ गया। नैस्डेक कंपोजिट सबसे ज्यादा 1,050 अंक (5.97%) गिरकर बंद हुआ।