नगर निगम में देहात और गांवों की अनदेखी पर जताया रोष
नई दिल्ली। 20 मार्च 25। दिल्ली पंचायत संघ ने दिल्ली नगर निगम सदन में दिल्ली देहात और गांवों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा व प्रस्ताव न लाने पर गहरा रोष प्रकट किया है। पंचायत संघ प्रमुख थान सिंह यादव ने सत्ता पक्ष को पहले ही चेताया था कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया तो विरोध किया जाएगा। लेकिन सदन में केवल राजनीतिक एजेंडे पर काम हो रहा है, जबकि दिल्ली देहात, गांव, गरीब और किसानों के मुद्दों से सरकार का कोई सरोकार नहीं दिख रहा।
- सभी पार्षद गांवों के मुद्दों पर आगे आएं-
पंचायत संघ के प्रमुख थान सिंह यादव ने दिल्ली नगर निगम के सभी पार्षदों से आग्रह किया कि वे किसी भी राजनीतिक दल से हों, लेकिन देहात और गांवों की समस्याओं को प्राथमिकता दें और उनके समाधान के लिए कार्य करें। उन्होंने बताया कि पंचायत संघ ने बीते वर्षों में कई बार नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के ज्ञापन मुख्यालय के गेट पर चस्पा किए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
दिल्ली पंचायत संघ ने नगर निगम से गांवों व ग्रामीणों की प्रमुख मांगें लगातार रखी हैं जिसमें –
1. गांवों का हाउस टैक्स पूरी तरह माफ किया जाए।
2. पार्किंग शुल्क और कन्वर्जन चार्ज से गांवों को मुक्त किया जाए।
3. गांवों को भवन उपनियम नियमों से बाहर रखा जाए।
4. रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए दिल्ली के सभी गांवों को व्यावसायिक श्रेणी में शामिल किया जाए।
5. नगर निगम की सभी सरकारी सेवाओं में ग्रामीण युवाओं को 100% आरक्षण दिया जाए।
- केजरीवाल की नीति पर सवाल-
संघ ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से सवाल किया कि वह 100 से 500 गज तक की संपत्तियों का हाउस टैक्स आधा माफ करने की बात कर रहे हैं, चाहे वे संपत्तियां डीडीए या नगर निगम द्वारा विकसित सुविधाओं से संपन्न हों और नगर निगम व दिल्ली सरकार द्वारा बनाया औद्योगिक क्षेत्र हो। लेकिन दिल्ली के गांवों को अब तक हाउस टैक्स में कोई राहत नहीं दी गई ओर ना ही रोजगार के लिए गांवों को व्यवसायिक श्रेणी में नोटिफाईड किया।
- महापंचायत का ऐलान-
दिल्ली पंचायत संघ के प्रमुख थान सिंह यादव ने नगर निगम में सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे देहात, गांव, गरीब और किसानों को अनदेखा न करें। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही सभी गांव पंचायतों, देहात व गांवों के मुद्दो पर काम करने वाले संगठनों और दिल्ली की सभी सर्व खापों की महापंचायत बुलाई जाएगी, जिसमें इन सभी समस्याओं और मांगों को लेकर ठोस निर्णय लिया जाएगा।