कर्नाटक हाईकोर्ट के जज बोले-संविधान बनाने में ब्राह्मणों का योगदान

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नई दिल्ली,22 जनवरी। कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित ने कहा है कि संविधान निर्माण में ब्राह्मणों का अहम योगदान था। संविधान की ड्राफ्ट कमेटी के 7 सदस्यों में से 3 ब्राह्मण थे।

उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ बीआर अंबेडकर ने भंडारकर इंस्टीट्यूट में कहा था कि अगर संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार बीएन राव ने संविधान का ड्राफ्ट तैयार नहीं किया होता तो इसे तैयार होने में 25 साल और लग जाते।

जस्टिस दीक्षित ने यह बात अखिल कर्नाटक ब्राह्मण महासभा की स्वर्ण जयंती के अवसर पर 18-19 जनवरी को बेंगलुरु में आयोजित दो दिवसीय ब्राह्मण सम्मेलन ‘विश्वामित्र’ में कही।

जस्टिस दीक्षित बोले- वेदव्यास मछुआरे, वाल्मीकि अनुसूचित जाति से थे

जस्टिस दीक्षित ने कहा कि वेदों का वर्गीकरण करने वाले वेदव्यास मछुआरे के बेटे थे और रामायण लिखने वाले महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से थे।

उन्होंने कहा- क्या हमने (ब्राह्मणों ने) उन्हें नीची नजर से देखा है? हम सदियों से भगवान राम की पूजा करते आए हैं और उनके मूल्यों को संविधान में शामिल किया गया है।

जस्टिस दीक्षित ने बताया कि वह इससे पहले गैर-ब्राह्मण राष्ट्रवादी आंदोलनों के साथ जुड़े थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस बनने के बाद उन्होंने अन्य सभी गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया है और न्यायिक दायरे के अंदर रहकर ही ये बातें कर रहे हैं।

जस्टिस वी श्रीशानंद बोले- ऐसे सम्मेलन जरूरी हैं

इस कार्यक्रम में उपस्थित जस्टिस वी श्रीशानंद भी मौजूद थे। कुछ लोगों द्वारा इस सम्मेलन की भव्यता पर सवाल उठाने को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन बहुत जरूरी हैं।

उन्होंने कहा- कई लोग प्रश्न करते हैं कि ऐसे वक्त में जब लोग भोजन और शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं तब ऐसे बड़े आयोजनों की क्या जरूरत है। लेकिन ये आयोजन समुदाय को एक साथ लाने और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आवश्यक हैं। ऐसे आयोजन क्यों नहीं किए जाने चाहिए?

बीएन राव कौन थे

सर बेनेगल नरसिंह राव एक सिविल सेवक, न्यायविद, राजनयिक और राजनेता थे। उन्होंने संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार के रूप में काम किया था। राव की 1947 में बर्मा और 1950 में भारत के संविधान का ड्रॉफ्ट तैयार करने में अहम भूमिका थी।

वे 1950 से 1952 तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के प्रतिनिधि भी थे।

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